वो क्या थे

वो क्या थे और हम क्या समझ बैठे,
पत्थर के बुत को इंसा समझ बैठे,
उन्हें तो खेलना था दिल से चंद रोज,
और हम उम्र भर का रिश्ता समझ बैठे..

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