कैसे न पिघले

मोम भला कैसे न पिघले,
सुरज ने आगाज किया है..
रोते अश्क कैसे न हसे,
आज खुद चाँद ने शृंगार किया है..
तुमसे दुरी कैसे सहे भला हम,
तूने मेरी सासो को थाम लिया है..

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