ज़िन्दगी

​कुछ अधूरे ख़्वाबों में..
भटक गयी है ज़िन्दगी..
कुछ टूटे हुए ज़िद के तारों में..
अटक गयी है.ज़िन्दगी…
कुछ लत सी लग गयी वफादारी की..
बेवफाओं के नाम कट गयी है ज़िन्दगी…
कभी जिन्होंने शिकवा न किया निभाने का..
उनकी रूहों से लिपट गयी है ज़िन्दगी….
फलसफा बहुत मुश्किल था पढ़ने, समझने का..
रात रात जागे..अब तो रट गयी है ज़िन्दगी…
कुछ अधूरे ख्वाबों में…
भटक गयी है जिन्दगी....

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